हमारे बारे में
     Name
     Phone
     City
     Email
     Query
   
   
श्री केशवदास अभिलेखागार

अक्तूबर, 1976 ई0 में भूतपूर्व सीतामऊ राज्य के अभिलेखागर को यथावत प्राप्त कर संस्थान ने इसकी स्थापना की ।


प्रारम्भिक काल की कुछ फारसी सनदों और मराठा आधिपत्यकाल के कुछ अभिलेखों को छोड़ते हुए, इस अभिलेखागार का मूल अभिलेख-संग्रह ईसा की उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य से प्रारम्भ होकर जून 30, 1948 ई0 तक का है, जब सीतामऊ राज्य का संयुक्त मध्य भारत राज्य में विलय हुआ । यों भूतपूर्व सीतामऊ राज्य का यह अभिलेखागार संस्थान को पूरा का पूरा यथावत प्राप्त हो गया है । इसमें ब्रिटिश सत्ता के अधीन मालवा प्रान्त के एक सर्वाधिकार प्राप्त छोटे राज्य की शासकीय परम्पराओं, प्रशासनिक व्यवस्था तथा आर्थिक परिस्थितियों से संबंधित यथासम्भव पूरी जानकारी इस अभिलेखागार में उपलब्ध है । 1857 ई0 के महान विप्लव के समय इन्दौर में स्थित सीतामऊ राज्य के वकील मिर्जा वजीर बेग के समकालीन सैकड़ों पत्र भी इस अभिलेखागार में उपलब्ध हैं । जिनमें इन्दौर और आस-पास के क्षेत्रों की घटनाओं का उस प्रत्यक्षदर्शी के निष्पक्ष विवरण और अनेक समकालीन घटनाओं के महत्त्वपूर्ण उल्लेख मिलते हैं ।


यहाँ हजारों मूल अभिलेखों के 412 बस्ते, लगभग 3000 बहियाँ और 2500 पुराने रजिस्टर हैं । भूतपूर्व सीतामऊ राज्य के "इंगलिश ऑफिस" (अंग्रेजी पत्र-व्यवहार के कार्यालय) की 450 फाइलों में हजारों महत्त्वपूर्ण पत्र और उनके उत्तर (मूल और सत्य प्रतिलिपियाँ) उपलब्ध हैं, जिनके द्वारा सीतामऊ राज्य का पिछले 50 वर्षों में अनेकानेक स्थानों से अंग्रेजी में हुए पत्राचार संबंधी जानकारी मिलती है । सीतामऊ राज्य के शासकों को प्रेषित किये गये खरीते आदि, अनेक गोपनीय पत्र, टांका रसीदें और ऐसी ही विशेष महत्त्वपूर्ण सामग्री यहाँ इस अभिलेखागार में बहुतायत से उपलब्ध है । यह सम्पूर्ण सामग्री विशेषतया राज्य के राजनैतिक, प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक इतिहास की पुनर्रचना में अत्यधिक लाभदायक और उपयोगी है ।

इस संग्रह में भारत सरकार के गजट, कई भारतीय राज्यों की अनेकों वार्षिक प्रशासनिक रिपोर्ट्स और गजट, 1920 ई0 के बाद के काल की कई पुरानी पत्रिकाएँ और भारतीय राज्यों के गजेटियर आदि लगभग 1150 मुद्रित पुस्तकें विभिन्न भारतीय राज्यों के 300 गजट सुलभ हैं ।


होल्कर राज्य की एडमिनिस्ट्रेशन रिपोर्ट (1894 से 1945 ई0) पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन रिपोर्ट (1905 से 1941 ई0) बजट एडमिनिस्ट्रेशन (1910 से 1918 ई0) लेण्ड रेवेन्यू रिकार्ड्स (1924 से 1938 ई0) आदि प्रकाशित रिपोर्टे उपलब्ध हैं ।


भूतपूर्व ग्वालियर राज्य के प्रशासनिक,आर्थिक और सामाजिक इतिहास से संबंधित “दरबार पालिसी“ (1924 से 1925 ई0) की जिल्दे, एडमिनिस्ट्रेशन रिपोर्ट्स (1923 से 1946 ई0) जयाजी प्रताप (सप्ताहिक पत्र) के अंक (1939 से 1943 ई0) आदि भी उपलब्ध हैं ।


ईसा की 17 वीं तथा उसके बाद की शताब्दियों में घटित घटनाओं से संबंधित मूल पत्रों अथवा उनकी सत्य प्रतिलिपियों को भी संगृहीत करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है । जिससे इस क्षेत्र से संबंधित जानकारी हेतु यह अभिलेखागार विशेष रूप से अवश्य ही एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय अभिलेख संग्रहालय बन जावेगा ।

रामपुरा से प्राप्त सामग्री
मन्दसौर जिला अन्तर्गत तहसील मुख्यालय रामपुरा पूर्व में चन्द्रावत शासकों और होल्करों का आधिपत्य स्थापित हो जाने के बाद होल्करों के स्थानीय शासन का केन्द्र रहा था ।


रामपुरा टप्पा कार्यालय में सुरक्षित होल्करों के समय का रामपुरा का सारा अभिलेखीय रेकार्ड फरवरी, 1983 ई0 में संस्थान को प्राप्त हुआ । इसमें कुल 1251 बस्ते हैं । इनमें भूराजस्व, प्रशासनिक व्यवस्था जनसाधारण की सामाजिक, आर्थिक दशा और व्यापार व्यवसाय, न्याय व्यवस्था आदि विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालने वाली विपुल सामग्री हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी (मोड़ी) में उपलब्ध हैं । होल्कर कालीन रामपुरा महाल के लगभग सब ही गांवों का मीसल बंदोबस्त इस संग्रह का महत्त्वपूर्ण अंग है जिससे उस क्षेत्र की सम्पूर्ण जानकारी सुलभ होती है । इसी तरह से इन अभिलेखों में भूराजस्व वसूली, पटवारियों के रोजनामचे, कोषालय के दैनिक नगदी पत्र, चुकारा रजिस्टर, अनाज गोदामों का हिसाब किताब, लाभ हानि रजिस्टर, आबकारी से प्राप्त दैनिक आय रजिस्टर, भूमि विवाद संबंधी आदि प्रमुख हैं। साथ ही देवस्थानों, संबंधी रजिस्टर, शंखोद्वार के मेले संबंधी अभिलेख भी तत्कालीन आर्थिक, सामाजिक व धार्मिक स्थिति पर प्रकाश डालते हैं। छपी पुस्तकों में होल्कर स्टेट के गजट सन् 1882 ई0 के बाद के सब ही रिपोर्ट आदि अति महत्त्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध है । मोड़ी लिपि में महत्त्वपूर्ण विपुल सामग्री इस संग्रह में सुलभ है । इस सम्पूर्ण संग्रह के कारण होल्करकालीन इस क्षेत्र के इतिहास की जानकारी सुलभ हो गई है।


कानोड़ संग्रह
भूतपूर्व उदयपुर राज्य के कानोड़ ठिकाने का पुरालेखीय संग्रह सन् 1983 ई0 में संस्थान को प्राप्त हुआ है। इसमें कानोड़ ठिकाने की आय-व्यय, भूमि प्रबन्ध राजस्व संबंधी महत्त्पूर्ण विवरण है । इस संग्रह से 19 वीं सदी के मेवाड़ राज्य की राजस्व व्यवस्था और आर्थिक स्थिति पर प्रकाश पड़ता है । संग्रह की बहियों की सूची तैयार की जा रही है ।