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वर्तमान अध्यक्ष - श्री पुरंजयसिंह राठौर

वर्तमान अध्यक्ष श्री पुरंजयसिंह राठौर का जन्म 1 जुलाई, 1971 ई. को मुम्बई में हुआ आपके पिता सीतामऊ रियासत के पूर्व महाराजा श्री कृष्णसिंह राठौर तथा माता महारानी श्रीमती योगेश्वरीकुमारी, सुपुत्री स्व. महाराणा भगवतसिंह, उदयपुर हैं।
पुरंजयसिंह ने अपनी नियमित प्रारम्भिक शिक्षा की शुरूआत सिन्धिया स्कूल, ग्वालियर तथा इन्दौर के ऐतिहासिक स्कूल डेली कालेज से की। ।

आप इस विद्यालय में वंशानुगत राजघराने के चैथी पीढ़ी के विद्यार्थी थे । आपने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र विषय में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त कर आप स्विट्जरलेण्ड गये, जहाँ आपने इन्स्टीट्यूट होटलियर सेसर रिटज से होटल मेनेजमेन्ट का प्रशिक्षण पूर्ण किया और बाद में इण्टरनेशनल कालेज ब्रिग, स्विटजरलेण्ड से आप इण्टरनेशनल हास्पिटलिटी एण्ड टूरिज्म से बी.एस-सी. किया । होटल इण्डस्ट्री की तरफ आपका झुकाव आपके नाना मेवाड़ के महाराणा भगवतसिंह जो 1960 के पूर्व के पथ प्रदर्शक रहे थे । वे प्रथम भारतीय शासक थे जिन्होंने अपने महल को होटल के रूप में परिवर्तित किया। युवा पुरन्जय का लालन-पालन भारत तथा विदेश के होटलों में हुआ । आप यूरोप में कई बार अंशकालीन समय के लिए गये । आपकी प्रथम नियुक्ति अमेरिका स्थित हेयाट रीजन्सी होटल डल्लस/फोर्ट वर्थ 1996 में हुई थी जहाँ इस समूह में कार्य किया । आपने यात्राएँ की और साइपैन के द्वीप में कार्य किया । आपने जापान, कोरिया तथा मुम्बई में भी कार्य किया । आप 2003 ई. में ओबेराय ग्रुप के होटलों में आए और दिलचस्प पदों पर आय टी सिटी बंगलौर से रणथम्भौर के शेरों तथा अब वर्तमान में दिल्ली के काँकरीट जंगल द ओबेराय में जनरल मैनेजर के पद पर पदस्थ हैं ।


पुरंजयसिंह अपने पिता तथा पूर्वजों के समान प्रकृति व जानवरों से अत्यधिक प्रेम रखते हैं । आपका उनसे असीम प्रेम है । आप अध्ययन, गोल्फ और क्रिकेट के शौकीन हैं । जब आप अपने कुत्तों के साथ समय व्यतीत करते है तब अत्यन्त प्रसन्नता महसूस करते हैं ।


पुरंजयसिंह का विवाह हिमाचल प्रदेश के कुठार के राना अरुण सेन तथा रानी निम्मी सेन की सुपुत्री राजकुमारी अरुणिमा के साथ हुआ ।


साहित्यिक श्रृंखला में जो सीतामऊ राजघराने में व्यक्तिगत जीवन में सदैव पूर्णता परिभाषित किया और आप स्कूल तथा कालेज के जीवन में देश और विदेश में अच्छे छात्र के रूप में पुरस्कृत हुए ।


पुरंजयसिंह सीतामऊ की साहित्यिक महत्ता तथा रीति-रिवाज, परम्परा में अत्यधिक दृढ़ स्थित हैं । साथ ही आप आधुनिक युग तथा व्यावसायिक संसार में विश्वव्यापी स्तर पर अनावरण करते हैं । आपका स्वप्न है कि नटनागर ऐतिहासिक संस्थान, सीतामऊ को अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा तथा मान्यता मिले ताकि आपके दादा, डा. रघुबीरसिंहजी जिन्होंने सम्पूर्ण जीवन कार्य किया, उनके सम्मान के लिए अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करना है । साथ ही आपकी हार्दिक इच्छा है कि सीतामऊ साहित्यिक और ऐतिहासिक क्षेत्र में विश्व के नक्शे में अग्रणी हो । सीतामऊ को शैक्षणिक क्षेत्र में ही नहीं आर्थिक क्षेत्र में भी लाभ हो और विगत समय के स्वर्णिम दिन के समान इस क्षेत्र में सुख और समृद्धि वापस लौटे ।