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श्री नटनागर शोध संस्थान की स्थापना

”यदि कभी स्वतन्त्र भारत में एक ‘केन्द्रीय ऐतिहासिक संस्था’ का निर्माण हुआ तो रघुबीर संग्रह इसकी अनिवार्य इकाई होगी । इसके पहले कि यह आदर्श साकार हो, राजपूताना -मालवा विश्वविद्यालय रघुबीर लायब्रेरी का पूर्ण उपयोग किये बिना हमारे देश के बीते काल पर कोई शोध कार्य नहीं कर सकता है ।“ आचार्य यदुनाथ सरकार द्वारा 1949 ई0 में देखे गये उपर्युक्त स्वप्न को साकार करने के लिए ही स्व0 डा. रघुबीरसिंह एम.ए., डी.लिट्., एल.एल.बी. ने अगस्त 14, 1974 ई0 को श्री नटनागर शोध संस्थान, सीतामऊ (मालवा-म.प्र.) की स्थापना की । उन्होंने श्री रघुबीर लायब्रेरी सीतामऊ और अपने अन्य संग्रहों को इसमें सम्मिलित कर दिया । संस्थान की स्थापना का उद्देश्य न केवल श्री रघुबीर लायब्रेरी के संग्रह की सुरक्षा करना व उसे अधिकाधिक सुसमृद्ध बनाना था, अपितु ऐतिहासिक शोध-कार्य तथा अध्ययन के लिये सीतामऊ आने वाले शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए पूर्व में सुलभ सुविधाओं को स्थायी, सुदृढ़ और चिर विकसित होते रहने वाले आधार पर सुव्यवस्थित करना भी था ।


श्री नटनागर शोध संस्थान, सीतामऊ का पंजीकरण मध्यप्रदेश रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 (सं. 44, वर्ष 1973) के अन्तर्गत सं. 4081 पर दिनांक जनवरी 16, 1975 ई0 को हुआ । मध्यप्रदेश राज्य शासन ने संस्थान को एक विशेष उल्लेखनीय संस्था के रूप में मान्यता प्रदान की और 1975-76 ई0 के वर्ष से लगातार अधिकाधिक वार्षिक पोषण अनुदान देता जा रहा है ।